बदहाल हो चुकी हिमाचल की सड़कों की हालत सुधरने वाली है, चुनावी वर्ष में ग्रामीण सड़कों खर्च होंगे 666 करोड़

मिशन रिपीट में हो सकती है सहायक सिद्ध

समाचार दृष्टि ब्यूरो/नाहन

प्रदेश की बदहाल हो चुकी सड़कों में सुधार के लिए केंद्र ने 600 करोड़ के बड़े बजट की स्वीकृति प्रदान कर दी है। चुनाव से पहले यदि सड़कों की स्तिथि सुधर जाती है इससे जनता को तो राहत मिलेगी ही भाजपा को भी लाभ मिल सकता है। शायद यही वजह है कि चुनावी वर्ष में हिमाचल की ग्रामीण सड़कों में सुधार के लिए बड़ा बजट मिल पाया है।

बता दें कि इस बार प्रदेश को पंजाब- हरियाणा से अधिक बजट मंजूर हुआ है। केंद्र ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत प्रदेश को 600 करोड़ के बजट की सांकेतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा को 150 व पंजाब को 400 करोड़ की राशि ही मंजूर हुई है। इस राशि में राज्यों का अपना हिस्सा भी जुड़ेगा। सडकों को मिले इस बजट में उत्तराखंड ने बाजी मारी है जिसे 900 करोड़ का बजट मंजूर हुआ है।

भाजपा हिमाचल में मिशन रिपीट करना चाहती है जिसमें सड़कों की बदहाली बड़ी बाधा बन सकती है। यही वजह है कि केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य को दिल खोलकर बजट दिया है। हालांकि, इसका आवंटन वास्तविक खर्च के आधार पर कम या ज्यादा हो सकता है। केंद्रीय मंत्रालय के उप सचिव केएम सिंह की ओर से हिमाचल सरकार के प्रधान सचिव लोनिवि को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है।

पीएमजीएसवाई के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रदेश के लिए 600 करोड़ रुपये का सांकेतिक बजट आवंटित हुआ है। इसमें हिमाचल प्रदेश को अपने हिस्से के 66.67 करोड़ रुपये जमा करने होंगे। इस तरह हिमाचल में कुल 666.67 करोड़ इस योजना के तहत सड़कों पर खर्च होंगे। इससे खस्ताहाल हो चुकी ग्रामीण सड़कें चकाचक तो होंगी ही इनमें फिर से रौनक लौट आएगी।

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